दो आत्मा का मिलन
"बहुत बार कोशिश की लेकिन मर नहीं पाया। जब भी ट्राई किया हर बार पछताया। आखिर समझते क्यों नहीं यमराज जी कि मैं इस दुनिया से तंग हो चुका हूं। हां, मैं मरना चाहता हूं। लेकिन वह कहते हैं अभी समय नहीं आया। कौन समझाए उन्हें कि जरूरी नहीं समय आने पर मरे। अरे समय से पहले दुनिया मर रही है मुझे भी उठा लो, पर वह सुनता ही नहीं है क्या करें कैसे समझाएं?
एक दिन तंग आकर उन्होंने बुलावा भिजवाया। दो शख्स आये थे उनके बड़े-बड़े सींग थे। उन्होंने आकर के मुझसे कहा की आपको यमराज ने है बुलाया।
मैंने खुश होकर सवाल किया- " मेरा मरने का समय आया क्या?"
"नहीं जिंदा ही बुलाया" उन्होंने जवाब दिया।
मैंने कहा- "यह कैसे हो पायेगा। भला जिंदा कोई कैसे जा सकता है?"
उन्होंने कहा- "चलो हमारे साथ हम बताएंगे"
बस फिर क्या था पहुंच गए यमराज के पास।
यमराज जी बोले- "बैठो बेटा, बहुत परेशान लगते हो इतनी भी क्या जल्दी मरने की जो बहुत बार कोशिश कर चुके हो?" फिर क्या था, यमराज जी को हमने अपना दुख क्या सुनाया वह बोले कि "बेटा! हम तेरा दुख सहन नहीं कर सकते तू जा वापस धरती पर हम तुझे नहीं झेल सकते।"
हमने कहा - "यमराज जी, ऐसा ना करो रख लो यही पे, चाहे कुछ भी करो"
यमराज ने लड़के की बात सुनी और कहा- " बेटा समस्या क्या है जो तुम मरना चाहते हो दुनिया धरती की तरफ भागती है तुम हमारे पास आना चाहते हो"
"यमराज जी बचा ही क्या है दुनिया में?
आपके नरक से ज्यादा बदतर दुनिया हो गई है। भाई-भाई से लड़ता है, कोई पैसा, कोई जायदाद के लिए, मां बाप आश्रमों में रह रहे हैं। बच्चे पूछते नहीं जिन मां बाप को भगवान का रूप दिया जाता है आज वही लोगों को बहुत बोझ लगने लगे हैं।
मुझे नहीं रहना इस धरती पर तुम मुझे अपने पास रख लो" मैंने कहा।
यमराज ने कहा- "नहीं बेटा ऐसा नहीं हो सकता तुम्हारी उम्र पूरी हो जाए फिर आ जाना"
हम भी पूछ बैठे- "भगवान जी अभी कितनी उम्र बाकी है"
"बेटा तीस के हो चुके हो अभी 50 और बाकी है" यमराज ने कहा।
मैंने हैरानी से कहा- "इतने साल…… यमराज जी मैं कैसे झेलूंगा। मैं नहीं झेल पाऊंगा इतना दुख। तुम मुझे आज ही उठा लो।"
मेरी बात सुनकर यमराज जी ने कहा- "एक बार फिर सोच ले फिर बाद में मत कहना की मैंने समझाया नही।
मैने कहा - "ठीक है।"
"जा धरती पर आज तेरा आखरी दिन है।" - यमराज ने कहा।
मैं वापस धरती पर आ गया। उसके बाद घर गया, सबसे मिला पर किसी को नहीं बताया कि आज मेरा आखिरी दिन है। सुबह से शाम हो गई लेकिन मेरा मरना भी पक्का नहीं हुआ।
मैं फिर यमराज जी को कोसने लगा।
यमराज जी बोले - "घर से निकल बाहर आ।"
मैं बाहर आ गया फिर वह बोले - "सीधा जा! जाकर रेलवे पटरी पर खड़ा हो जा जब सामने से एक्सप्रेस आएगी उससे टकरा के मर जाना।"
मैं पटरी पर चला गया और उसके बीचो बीच बैठ गया। सामने से ट्रेन आई मेरी दिल की धड़कन बढ़ने लगी।
जैसे-जैसे ट्रेन नजदीक आती जा रही थी वैसे-वैसे धड़कन बढ़ती जा रही थी। दिमाग में ख्याल आया कि इतनी भी मरने की जल्दी क्या है? अभी तो दुनिया भी नहीं देखी।
ट्रेन और नजदीक आ गई। मैं सामने से हट गया।
तुरंत यमराज जी आए और पूछा - "क्या हुआ बेटा? तू तो मरना चाहता था ना।" मैंने बोला - "नहीं यमराज जी, यह तो ज्यादा ही डरावना है। कोई आसान तरीका बताओ।" यमराज जी ने कहा - "ठीक हैं। एक मौका और देता हूं, चल मेरे साथ।"
मैं उनके साथ चला गया वह मुझे एक नदी के पास ले गए और बोले - "कूद जा!" मैंने पानी की तरफ देखा। थोड़ा आगे बढ़ा। फिर से धड़कन बढ़ गई।
मैंने बोला - "नहीं। हे यमराज जी! यह नहीं होगा मुझसे।"
"मुझे पानी से डर लगता है मैं पानी में नही कूद पाऊंगा।"
उन्होंने बोला - "जिंदगी इतनी प्यारी है तो क्यों मरने की जल्दी क्यों है?"
"जब तेरे बस का कुछ है ही नहीं तो क्यों मुझे कोसता है?"
मैंने बोला - "मुझे जीना नहीं है। लेकिन मरना भी आसानी से चाहता हूं।"
वह बोले - "यह मेरे रूल्स के खिलाफ है। मैं तुझे खुद नहीं मार सकता। तुझे खुद ही मरना होगा।
उन्होंने जिज्ञासा पूर्वक पूछा - "अभी भी मरना है?"
मेरे मन में ख्याल आया कि मना कर दूं पर फिर एक मन ने मुझसे कहा - "जी कर क्या करूंगा?"
मैंने बोला - "मरना है।
उन्होंने कहा - "तुझे एक और मौका देता हूं। अगर इस बार तो नहीं मरा तो फिर तुम मुझे कभी मत बुलाना और ना ही कभी कोसना।"
मैंने बोला - "ठीक है, यमराज जी।
बताइए कहां चलना है?"
वह बोले - "चल मेरे साथ।"
मैं उनके साथ चला गया फिर वह मुझे लेकर एक घर के पास गए।
जहां आस पास कुछ नहीं था चारों तरफ जंगल और उसके बीच एक घर था।
उन्होंने मुझसे बोला - "बेटा तीन दिन तुम इस घर में रह लो।"
"चौथे दिन में तुम्हें उठा कर ले जाऊंगा लेकिन अगर तुम तीन दिन से पहले यहां से भाग गए, तो फिर तुम कभी मुझे याद नहीं करोगे।
मैंने बोला - "ठीक है, यमराज जी।
मैं तीन दिन रह लूंगा। लेकिन चौथे दिन आप मुझे ले यहां से ले जाना।
यह सुनकर यमराज जी चले गए।
अब मैंने सोचा अंदर जाया जाए।
मैंने दरवाजा खोला। चर की आवाज के साथ दरवाजा खुला।
घर अंदर से देखने में भूतिया हवेली जैसा था।
अंदर देखा तो कोई नहीं दिखा।
मैने आवाज लगाई पर किसी का जवाब नहीं मिला।
मैंने चारों तरफ देखा वहां कोई नहीं था। ना उस घर में ना ऊपर वाले कमरे में।
मैंने पूरे घर की तलाशी ले ली लेकिन कोई नहीं मिला "यमराज जी ने बोला था तीन दिन तक घर से नहीं जाना।"
उनकी बात याद करके मैंने तीन दिन वहीं रुकने का फैसला किया।
शाम हो चुकी थी धीरे-धीरे अंधेरा गहराने लगा।
जैसे-जैसे अंधेरा गहरा रहा था वह घर और डरावना होता जा रहा था।
लेकिन मैंने तो मरने का मन पक्का कर रखा था इसलिए मैं नहीं डरा अब थोड़ी देर में भूख लगने लगी मैंने सोचा क्या खाया जाए मैं उस घर की किचन में गया।
जाकर देखा वहां पर खाने का सामान रखा था। मैंने खाना बनाया और उसे उसे वही रख कर बाथरूम चला गया।
वहां नहाया धोया और खाना खाने के लिए आया। पर ये क्या? जब वापिस किचन आकर देखा तो पाया कि किचन के सारे बर्तन खाली थे।
जो भी खाना बनाया था वह कुछ भी बचा हुआ ना था।
मैने पूरे घर में देखा पर मुंह वहां कोई ना था। मेरा दिमाग खराब हो गया यह सोचकर की आखिर खाना कौन खा गया?
पर अब भी बहुत तेज भूख लगी थी। इसलिए मैने दोबारा खाना बनाया।
लेकिन इस बार मैं कहीं नहीं गया। खाना परोसा और बाहर आकर बैठ कर खाना शुरु कर दिया तभी मुझे अजीब सी परछाई दिखाई दी जो मेरे पास ही आ रही थी। वह बिल्कुल मेरे सामने आकर रुकी मैंने डरते हुए पूछा - "कौन हो तुम?"
उसने भी मेरे से मेरा ही सवाल दोहराया - "कौन हो तुम और यहां कैसे आए?"
अब यह भी नहीं कह सकता कि मुझे खुद यमराज जी छोड़ कर गए इसलिये मैंने बहाना बनाते हुए कहा- "यहां रहने आया हूं।"
"इस घर में कोई नहीं आता तुम्हे रहने के लिए ये ही घर मिला क्या?" उसने पूछा।
मैं कुछ कहता कि उसने फिर से सवाल किया- "नाम क्या है तुम्हारा?
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसे देख कर थोड़ा-थोड़ा डर लग रहा था अब हमने अपनी जगह अपने दोस्त का नाम बता दिया- "जी मेरा नाम वरदान है।"
वह बोली मेरा नाम मोहिनी है मैंने उसे नमस्ते कहा तो वह बहुत जोर जोर से हंसने लगी।
"तू यहां मुझे नमस्ते करने आया है"
"नहीं मैं तो यहां रहने आया हूं।"
वह बोली फिर तुझे पता है इस घर में एक चुड़ैल रहती है। मैंने बोला - "मुझे नहीं पता।"
मैंने उससे पूछा - "तुम्हें डर नहीं लगता?" वो बोली - "मुझे डर नहीं लगता।"
मैंने कहा - कही चुड़ैल ने तुम्हें कुछ कर दिया तो?
वह बोली - "वह मेरा कुछ नहीं कर सकती।"
मैंने पूछा- "क्या वह मुझे मार देगी?"
वह बोली - "नहीं।"
मैंने कहा - "ठीक है।"
मैंने उससे पूछा - "अभी थोड़ी देर पहले मेरा खाना तुमने खाया?"
वह बोली - "हां, मुझे बहुत भूख लगी थी इसलिए खा लिया।
मैंने कहा - "जब मैं यहां आया था तब पूरा घर छान मारा था। तब तो तुम नहीं मिली।
वह बोली - *मैं बाहर घूमने गई थी।"
मैंने पूछा - "तुम मेरी दोस्त बनोगी?"
उसने कहा - "ठीक है, बन जाऊंगी लेकिन कभी दोस्त से आगे बढ़ने की कोशिश मत करना।
मैंने बोला - "नहीं, सिर्फ तीन दिन के लिए दोस्ती करनी है। उसके बाद तो मैं यहां से चला जाऊंगा।
वो बोली - "एक बार हमसे दोस्ती कर ली फिर तुम यहां से कभी नहीं जा पाओगे।"
मैंने पूछा - "ऐसा क्यों कह रही हो?"
वह बोली - "ऐसा ही है।"
मैंने कहा - "ठीक है, देखते हैं।
खाना खाने के बाद मैं जाकर सो गया।
वह भी अपने कमरे में चली गई।
अगले दिन मैं सुबह उठा फिर नहा धोकर सीधे किचन तरफ चला गया।
वह लड़की मुझे किचन में वहीं पर बैठी मिली।
मैंने पूछा- "तुम इतनी सुबह क्यों उठी ?" उसने कहा - "मुझे नींद नहीं आती।"
मैंने पूछा - "तुमने नाश्ता किया?"
वह बोली - "मुझे बनाना नहीं आता"
मैंने कहा- " फिर तुम इतने दिन से क्या खाती थी?"
"कामवाली आती थी जो कल से नहीं आ रही है वही सब काम करके जाती थी" उसने कहा।
मैंने नाश्ता बनाया उसे भी दिया खुद भी खाया वो बोली - "मेरे साथ बाहर जंगल में घूमने चलोगे?"
मैंने जाने से मना कर दिया। और कहा कि मैं बाहर नहीं जाऊंगा। पर वह जबरदस्ती मुझे अपने साथ ले गई।
घर से बाहर निकलते ही यमराज जी की आवाज सुनाई दी - "अब तो कभी मुझे मत कहना तूने थी रुल तोड़ दिया"
मैंने माफी मांगते हुए कहा- "क्षमा कर दो यमराज जी पर ये लड़की मुझे जबरदस्ती बाहर लाई।"
मेरी बात सुनने के बाद यमराज जी की आवाज नहीं आई। मैं समझ गया की शायद यमराज जी नाराज हो गए। अब क्या करें? वह तो मानेंगे नहीं।
मैंने सोचा चलो देखते हैं जो होगा देखा जाएगा।
मैं मोहिनी के साथ जंगल में चला गया। हम एक झील के किनारे बैठे थे। वो मुझसे बात कर रही थी वह इतनी सुंदर थी जिसकी कुछ हद नहीं। जो भी उसे देख ले बस देखता ही रह जाए। लेकिन उसकी बातों से ऐसा लगता था जैसे वह 20 साल पहले की बातें करती हो। हमें बात करते-करते शाम हो गई हम उठ कर वापस घर के लिए चल दिए। ऐसे ही यह दिन बीत गया। अब एक एक करके दिन बीतते गए और ऐसे ही एक महीना बीत गया। मुझे उससे मोहब्बत हो गई पर हमेशा उसकी वही बात याद आ जाती जो उसने कहा था "कि दोस्ती से आगे मत बढ़ना"। लेकिन यह दिल नहीं माना एक दिन मैंने उससे बोल दिया कि मुझे तुमसे प्यार है।
यह सुनते ही वह भड़क गई उसने मुझे उठा-उठा कर इतना पटका कि मेरी हालत खराब हो गई मुझे उससे डर लगने लगा। मैंने सोचा कि इतनी भोली लड़की आखिर इतनी खतरनाक कैसे हो सकती है।
मोहिनी ने कहां - "भोली नहीं हूं मैं।
मैं मोहिनी हूं, इस घर की चुड़ैल।"
भाई साहब इतना सुनते ही मेरी इतनी हालत खराब हो गई कि मैं क्या ही बताऊ।
तो क्या मैं इतने दिनों से चुड़ैल के साथ रह रहा था?
लेकिन उसने मुझे मारा क्यों नहीं वो अगर चाहती तो मुझे पहले दिन ही मार सकती थी।
मैंने उससे कहा- "तुम बुरी नहीं हो अगर तुम बुरी होती तो मुझे पहले ही दिन मार देती। लेकिन तुमने मुझे नहीं मारा। क्या मैं जान सकता हूं कि तुम चुड़ैल कैसे बनी?"
वह बोली - "मुझे प्यार शब्द से नफरत है इस प्यार के ही कारण मैं आज चुडैल बनी। तुम्हें पता है मैं एक लड़के से प्यार करती थी उसने मुझे धोखा दिया।
प्यार के नाम पर वह मुझे घुमाने ले गया और इस जंगल में ले आया। लेकिन मुझे नहीं पता था वह मुझसे नहीं मेरे शरीर से प्यार करता है। उसने और उसके दोस्तों ने मिलकर मेरा रेप किया और मुझे जान से मार दिया। और मेरी लाश को इसी घर के नीचे दफना दिया। तभी से मैं इस घर में रहती हूं।"
मुझे आज मरे हुए पूरे 20 साल हो गए।
20 साल बाद इस घर में कोई आया वरना किसी की हिम्मत नहीं कोई इस घर में आ जाए। लेकिन तुम्हें देखकर ऐसा लगा तुम गलत नहीं हो इसीलिए तुम्हें कुछ नहीं कहा। लेकिन तुम भी वही प्यार प्यार प्यार करने लगे।"
मैंने कहा - "मैं ऐसा नहीं हूं। मुझे सिर्फ़ तुमसे प्यार है तुम्हारे शरीर से नहीं। मुझे तुम्हारी आत्मा से प्रेम है।"
वह बोली - "जब तुम्हें बता दिया कि मैं मर चुकी हूं एक आत्मा हूं फिर भी तुम्हें मुझसे प्यार है?
मैंने कहा - "हां फिर भी मुझे तुमसे प्यार है और मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं। चाहे उसके लिए मुझे मरना ही क्यों ना पड़े।
यह सुनकर उसकी आंखों में आंसु आ गए।
वह बोली- "इतना प्यार करते हो मुझसे? अपनी जान से भी ज्यादा, मरना मंजूर है मेरे लिए?" मोहिनी ने पूछा।
मैंने कहा - "जब तुम कहो।"
वह बोली शादी करोगे मुझसे मैंने बोला अभी तैयार हूं मैं करने के लिए फिर हम दोनों ने शादी कर ली उसने बोला लेकिन जब तक तुम जिंदा हो हमारा मिलन नहीं हो पाएगा मैंने बोला कोई बात नहीं जब तुम कहो तब मिलने के लिए भी तैयार हूँ।
मैंने अपने बाकी की जिंदगी भी उसी कमरे में बिताई, क्योकि यमराज नाराज हो गए थे और उन्होंने मुझे उठाने की योजना केंसल कर दिया, जिस वजह से मुझे 50 साल और जीना पड़ा, मैंने भी अपने बाकी के पचास साल उस घर में ही बिता दिए फिर जब मेरी उम्र पूरी हो गई तो मेरी मृत्यु हो गई। मृत्यु के पश्चात हमारी आत्माओं का मिलन हुआ उसके बाद उसे और मुझे दोनों को मुक्ति मिल गई हम दोनों की आत्माएं एक साथ एक नई दुनिया मे चली गयी।
समाप्त
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